गुरुवार, 11 जून 2015

साहित्यिक यूरोपीय यात्रा ........

बड़े हर्ष व सुखानुभूतियों के बीच आप से साझा मेरा सरोकार -
      मेरी साहित्यिक यूरोपीय यात्रा [ ब्रिटेन ,स्वीटजरलैंड ,फ्रांस ,जर्मनी ] दिनांक 14/06/2015 से आरंभ होकर 25 जून 2015 को वतन वापसी पर विराम पाएगी । महान साहित्यकार शेक्सपियर जी की ग्राम्य - स्थली को नमन करने का सौभाग्य विभिन्न मूर्धन्य प्रवासी ,अप्रवासी साहित्यकारों का सानिध्य अप्रतिम विचारों का श्रवण ,पाठन लाभ रोमांचित करता है । मेरी साहित्यिक यात्रा आप के आशीष स्नेह व दिये आत्मबल से ही पूरी होनी संभव है । आकांक्षी हैं आप मित्रों के अशेष स्नेह माधुर्य के ।
मेरी नवल कृति ' निर्वाण ' कहानी संग्रह का विमोचन ,क्राईडल हिल्टन इंग्लैंड [स्वामी विवेकानंद सभागार ] में होना सुनिश्चित है । हिन्दी भाषा लिपि व वैश्विक हिन्दी की अनिवार्यता' विषय मुख्य हृदय -विंदु होंगे । यह साहित्यिक यात्रा अपने विभिन्न चरणों को प्राप्त करती हुई कई मायनों मे महत्व पूर्ण है। कथा यूके [लंदन की ख्याति लव्ध हिन्दी पत्रिका ] का विमर्श स्थानीय साहित्यकारों व स्कालरों का मिलन भी सुखद होगा ।
इस उपक्रम के हृदय स्थली मे डॉ आशीष, विश्व हिन्दी साहित्य [अध्यक्ष ] वाणी समूह व अन्य हिन्दी सेवी संस्थानों का अप्रतिम योगदान हिन्दी की यश गाथा को उच्चतम शिखर देगा विस्वास के साथ बधाई देते हैं ।
आभारी हैं गुरु ग्रंथ साहिब जी , गुरु शिक्षकों ,परिजनों ,मित्रों ,सुधि पाठकों एवं समस्त देश वासियों के ।
उदय वीर सिंह
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5 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (12-06-2015) को "उलझे हुए शब्द-ज़रूरी तो नहीं" { चर्चा - 2004 } पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

मन के - मनके ने कहा…

बधाई,

मन के - मनके ने कहा…

बधाई,

Madan Mohan Saxena ने कहा…

हृदयस्पर्शी भावपूर्ण प्रस्तुति.बहुत शानदार ,बधाई. कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

badhai