मंगलवार, 29 नवंबर 2016

सरकारें तों मजे मौज में

सरकारें तों मजे मौज में
जनता को रोना होता है 
उनके मुंह में मद मोदक 
इनको भूखे सोना होता है -

प्रारव्ध में आँसू क्यों मिलते 
पैरों में विवाई जनता को 
दुर्दिन का छाजन इनके सिर 
आँचल ही अपना होता है -


उदय वीर सिंह 

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा आज बुधवार (30-11-2016) के चर्चा मंच "कवि लिखने से डरता हूँ" (चर्चा अंक-2542) पर भी होगी!
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'