शनिवार, 20 मई 2017

कुछ संवेदना मैं बाजार से खरीद लाया हूँ

कुछ संवेदना मैं बाजार से खरीद लाया हूँ
माडल नंगी थी चित्र रंगों से ढक आया हूँ -
बच्चे के इलाज में किडनी वसूल ली वीर
आराम के लिए नींद की गोली दे आया हूँ
शहर में कुछ बदरंग बस्तियाँ रहें क्यों
शहर से बहुत दूर उन्हें कहीं छोड़ आया हूँ -
माँ बाप से प्यार इतना है कि निः शब्द हूँ
मूर्तियाँ घर में उन्हें अनाथालय छोड़ आया हूँ -
पड़ोसी मेरे धर्म का नहीं कितना बड़ा अनर्थ
दीवार कर ऊंची बहुत रिश्ते तोड़ आया हूँ -
मशालों ने गुमराह कर दिया परछाईयों को
हुत दूर कहीं अँधेरों में उन्हें छोड़ आया हूँ -

उदय वीर सिंह 




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