शनिवार, 17 जून 2017

दरबार भरे हैं वादों से

कौन कहता है कंगाली है खाली है बदहाली है
दरबार भरे  हैं वादों से
आँखों की ज्योति नहीं बदली चश्में सारे बदल रहे
चौबारे.विस्वास  से खाली है,,बाजार भरे उन्मादों से 
बढ़ती  समस्याएँ हनुमान की पुंछ सदिस 
अखबार भरे ,संवादों से 
हासिल है मिश्री मक्खन उनको 
मजलूम मरे.किसान.मरे अवससदों दों से ...

उदय वीर सिंह 


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