रविवार, 2 जुलाई 2017

साधना समृद्ध हो गई है -

कागज पर लिख दी गंगा
कविता शुद्ध हो गई है -
कागज पर लिखा हिमालय
सरिता अवरुद्ध हो गई है -
कागज पर लिखा कठोर 
करुणा निशिद्ध हो गई है -
कोरी कल्पना के प्रतिमान मेरे ऊंचे हुए
चेतना प्रसिद्ध हो गई है -
कागज पर लिखी प्रतिष्ठा
साधना समृद्ध हो गई है -
लिखा G S T के बाबत तो
व्यवस्था क्रुद्ध हो गई है -
उदय वीर सिंह

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