रविवार, 2 अक्तूबर 2011

प्रियोदित

हम  तुम्हारे  नहीं , तुम   हमारे   नहीं ,
आग ,पतझड़   में  खिलती, बहारें नहीं ,--
*
तेरा सूरज सा  बनने की  शुभकामना ,
ऋतू   ऐसी   नहीं   की ,  अन्हारे  नहीं --
*
पथ गमन  कर रहा ,बन के परछाईयाँ ,
दूर  मंजिल  भले , फिर भी   हारे  नहीं ---   
*
छीन सकता है कोई ,चमन    वो  कली ,
कौन   कहता ,गगन  में   सितारे   नहीं ---
*
डूब   जाने  का  डर , मेरे  दिल  में  नहीं ,
ऐसी   दरिया   नहीं,   जो  किनारे   नहीं ---
*
पत्थरों   की  तरह   टूट  बिखरेंगे क्यों ,
ऐसी   दुनियां  नहीं   की  , सहारे   नहीं ---


                                         *     उदय वीर सिंह .




  

16 टिप्‍पणियां:

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भाई उदय वीर जी सत् श्री अकाल बहुत सुन्दर गज़ल बधाई

मनोज कुमार ने कहा…

पथ गमन कर रहा ,बन के परछाईयाँ ,
दूर मंजिल भले , फिर भी हारे नहीं ---

ग़ज़ल के हरेक शे’र मेम एक ताज़गी और जोश भरा है।

दिलबाग विर्क ने कहा…

खूबसूरत रचना
ग़ज़ल पसंद आए तो कृपया LIKE करें

रविकर ने कहा…

अथ आमंत्रण आपको, आकर दें आशीष |
अपनी प्रस्तुति पाइए, साथ और भी बीस ||
सोमवार
चर्चा-मंच 656
http://charchamanch.blogspot.com/

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

वाह क्या बात है ! बहुत सुन्दर !
पूरी ग़ज़ल उम्दा है !

प्रेम सरोवर ने कहा…

आपके पोस्ट पर पहली बार आया हूं । पोस्ट अच्छा लगा । .धन्यवाद ।

रविकर ने कहा…

शुभकामनाएं||
बहुत ही बढ़िया ||
बधाई |

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत सुन्दर प्तथा सार्थक रचना , आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है आपने!
--
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और यशस्वी प्रधानमंत्री रहे स्व. लालबहादुर शास्त्री के जन्मदिवस पर उन्हें स्मरण करते हुए मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि!
इन महामना महापुरुषों के जन्मदिन दो अक्टूबर की आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…



* सतश्री अकाल जी ! *



आदरणीय उदय वीर सिंह जी
सादर नमस्कार !

वदिया रचना है जी -
पथ गमन कर रहा ,बन के परछाइयां
दूर मंजिल भले , फिर भी हारे नहीं

ख़ूबसूरत रचना के लिए मुबारकबाद !


नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाओं सहित
-राजेन्द्र स्वर्णकार

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर गजल... ! बधाई

veerubhai ने कहा…

डूब जाने का डर , मेरे दिल में नहीं ,
ऐसी दरिया नहीं, जो किनारे नहीं ---
ज़िन्दगी में आस उजास की आस सकारात्मक विचार निश्चिंतता की रचना .

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत बढि़या कहा है ।

वाणी गीत ने कहा…

पथ गमन कर रहा ,बन के परछाईयाँ ,
दूर मंजिल भले , फिर भी हारे नहीं !

प्रेरक ज़ज्बा !

Deepak Saini ने कहा…

डूब जाने का डर , मेरे दिल में नहीं ,
ऐसी दरिया नहीं, जो किनारे नहीं

बहुत खूब

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

उम्दा ग़ज़ल...
सादर...