बुधवार, 25 जनवरी 2012

स्वर प्रीत के

गीत  गायें की मधु रस  बरसने  लगे,
फूल  खिलने  से पहले  महकने लगे -

प्रीत के आगमन की फिजां मद-भरी,,
बिन  साज   के  पग   थिरकने   लगे -

वीथियों  में कदम ,स्नेह के जब  पड़े ,
झूम  खुशियों  के बादल  बरसने लगे -


इन  आँखों  में  सागर सी  गहराईयाँ ,
जब  छलका  तो मोती  बिखरने लगे -


उनके  कदमों  की आहट में संगीत है,
पत्थर  भी  नुपुर  सा  खनकने   लगे-


दिल  लगाया नहीं , टूट  जाने का  डर ,
इसको महफूज  गलियों  में रखते रहे - 


                                        उदय वीर सिंह.
                                         25 .01 .2012 

  

9 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रेम वातावरण में सोंधापन भर देता है..

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

उनके कदमों की आहट में संगीत है,
पत्थर भी नुपुर सा खनकने लगे.
दिल लगाया नहीं , टूट जाने का डर ,
इसको महफूज गलियों में रखते रहे .

बहुत ही मधुर प्रेम-गीत.....

anju(anu) choudhary ने कहा…

इन आँखों में सागर सी गहराईयाँ ,
जब छलका तो मोती बिखरने लगे -


वाह बहुत खूब

dheerendra ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति,भावपूर्ण रचना,वाह वाह.उदय जी
WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....
फालोवर बनने के बाद आप मेरे पोस्ट पर एक भी बार नही आये,....आइये स्वागत है,...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर ..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

उनके कदमों की आहट में संगीत है,
पत्थर भी नुपुर सा खनकने लगे..

वाह ... कमाल की कल्पना है .. उनके कदम भी क्या कमाल हैं ... लाजवाब ..

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

खूबसूरत कविता... बहुत सुन्दर उदय साहब... प्रेम की खुशबू रची बसी है इस कविता में...

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

खुश करते सुंदर एहसास ...
बहुत सुंदर रचना ..

नीरज गोस्वामी ने कहा…

प्रीत के आगमन की फिजां मद-भरी,,
बिन साज के पग थिरकने लगे -

इन आँखों में सागर सी गहराईयाँ ,
जब छलका तो मोती बिखरने लगे -


उनके कदमों की आहट में संगीत है,
पत्थर भी नुपुर सा खनकने लगे-

वाह..वाह...वाह...शब्दों का ऐसा अनूठा संगम बेजोड़ है...बहुत बहुत बधाई...

नीरज