शनिवार, 26 जुलाई 2014

मुख्तारम

मुख्तारम
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ताशकंद (उज़बेकिस्तान) की तकरीबन सात वर्षीया बालिका का भारत ( इंडिया ) प्रेम मुझे उद्वेलित करता है | मेरे चार्वाक झील के भ्रमण के दौरान मैं बेफिक्र कैमरा लिए बेमिशाल वातावरण व स्वर्ग सरीखे दृश्यों को अपने कैमरे में कैद करने में लीन व सौंदर्य का अवलोकन मंत्रमुग्ध हो कर रहा था , कि एक नन्हें हाथों की नन्हीं उँगलियों ने मुझे स्पर्श किया | पीछे देखा तो एक परी सी अल्हड़ बालिका को संकोची मुस्कराहट के साथ पाया |
हेलो माई डॉटर !
" दस्वेदानियां " मैंने बोला |
नमस्ते ! उत्तर में वह बोली |
मैं मंत्रमुग्ध रह गया ,कुछ दुरी पर बालिका की माँ व एक साल उससे बड़ा भाई हमदोनों की ओर देख मुसकरा रहे थे | मैंने उन्हें देख हाथ जोड़ नमस्ते किया | वे पास आये
मैंने बालिका से पूछा
व्हाट इज़ योर नेम ?
वह मुंह पर हाथ रख खिलखिला कर हंस पड़ी और अपनी माँ की और देखा
माँ ने कुछ कहा जो मुझे समझ नहीं आया,
पर वह बालिका बोली -
यू इंडिया ?
यस ! आई ऍम फ्रॉम इंडिया | मैं बोला |
"आई लव इंडिया " वह चहकते हुए बोली
मैं कुछ पूछता, वह बोली -
यू नेम ? मूलतः वह उज्बेक भाषा जानती थी | अंग्रेजी भी स्कूल में सिख रही थी | वह जान गयी थी की मुझे उज्बेक भाषा नहीं आती है ,इसलिए अंग्रेजी में कुछ स्वयं व अपनी माँ की सहायता से मुझसे संवाद करने का मोह नहीं छोड़ पा रही थी |
उदय वीर सिंह , अपनी तरफ इशारा करते हुए मैंने उसे अपना नाम बताया
उदे वीर सिं ! गुड और बेबाक हंस पड़ी |
मैंने फिर उसका नाम पूछा |
अपनी मां की तरफ देखा फिर बोली
मुगझारम ..|
मैं समझ नहीं पाया ,मेरे चहरे पर प्रश्न चिन्ह के भाव थे | मुगझारम ! बोल वह फिर मेरी तरफ देखा |
मेरी असहज स्थिति को देख उसने कलम की ओर इशारा किया मैंने उसे कलम दे दिया |
फिर उसने मेरे दाहिनी हथेली पर अंग्रेजी अल्फाबेट में
अपना नाम लिखा -
" muxaram "
एक सुखद अहसास .
मैंने बोला "मुख्तारम " !.
मुस्कराते हुए उसने अपना सिर हिलाया | .
.और मुझे मेरी कलम देते हुए उसने अपनी हथेली मेरी ओर कर दिया |
मैंने उसकी हथेली पर मैंने औटोग्राफ दे दिया,उसने
अपना दूसरा हाथ भी आगे किया |
मैंने दूसरे हाथ पर "INDIA " लिखा |
उसका भाई उत्सुकता से अपना हाथ मेरी ओर किया और मैंने अपने हस्ताक्षर उसके भी हथेली पर कर दिए |
दोनों भाई बहन अब अपनी माँ के पास थे |
मुझे आगे जाना था , चल पड़ा
दस्वेदानियां ...|
दस्वेदानियां ! नमस्ते ! नमस्ते ! का स्वर मैं सुन रहा था
मुख्तारम का निश्छल वात्सल्य प्रेम बरबस याद आता है-
नमस्ते ! यू इंडिया ?

- उदय वीर सिंह
Photo: मुख्तारम 
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ताशकंद (उज़बेकिस्तान) की तकरीबन सात वर्षीया बालिका का भारत  ( इंडिया ) प्रेम मुझे उद्वेलित करता है | मेरे चार्वाक झील  के भ्रमण के दौरान मैं बेफिक्र कैमरा लिए बेमिशाल वातावरण व स्वर्ग सरीखे दृश्यों को अपने  कैमरे में कैद करने में लीन व सौंदर्य का अवलोकन मंत्रमुग्ध हो कर रहा था , कि एक नन्हें हाथों की नन्हीं उँगलियों ने मुझे स्पर्श किया | पीछे देखा तो एक परी सी अल्हड़ बालिका को संकोची  मुस्कराहट के साथ पाया |
 हेलो माई  डॉटर !
 " दस्वेदानियां  " मैंने बोला |
नमस्ते  ! उत्तर में  वह बोली |
मैं मंत्रमुग्ध रह गया ,कुछ दुरी पर बालिका की माँ व एक साल उससे बड़ा भाई हमदोनों की ओर देख मुसकरा रहे  थे | मैंने उन्हें देख हाथ जोड़ नमस्ते किया | वे पास आये 
 मैंने बालिका से पूछा 
व्हाट इज़ योर नेम  ?
वह मुंह पर हाथ रख खिलखिला कर हंस पड़ी और अपनी माँ की और देखा 
माँ ने कुछ कहा जो मुझे समझ नहीं आया,
पर वह बालिका बोली -
यू इंडिया ? 
यस !  आई ऍम फ्रॉम इंडिया | मैं बोला |
 "आई लव इंडिया  " वह चहकते हुए बोली 
मैं कुछ पूछता, वह बोली -
यू नेम ? मूलतः वह उज्बेक भाषा जानती थी | अंग्रेजी भी स्कूल में सिख रही थी | वह जान गयी थी की मुझे उज्बेक भाषा नहीं आती है ,इसलिए अंग्रेजी में  कुछ स्वयं व अपनी माँ की सहायता से मुझसे संवाद करने का मोह नहीं छोड़ पा रही थी |
 उदय वीर सिंह , अपनी तरफ इशारा करते हुए मैंने उसे अपना नाम बताया 
उदे वीर सिं ! गुड और बेबाक हंस पड़ी |
मैंने फिर उसका नाम पूछा |
अपनी मां की तरफ देखा फिर बोली 
मुगझारम ..|
मैं समझ नहीं पाया ,मेरे चहरे पर प्रश्न चिन्ह के भाव थे | मुगझारम  ! बोल वह फिर मेरी तरफ देखा |
मेरी असहज स्थिति को देख उसने कलम की ओर इशारा किया मैंने उसे कलम दे दिया |
फिर उसने मेरे दाहिनी हथेली पर अंग्रेजी अल्फाबेट में 
अपना नाम लिखा -
" muxaram "  
एक सुखद अहसास .
मैंने बोला  "मुख्तारम " !.
 मुस्कराते  हुए उसने अपना सिर हिलाया | .
.और मुझे मेरी कलम देते हुए उसने अपनी हथेली मेरी ओर कर दिया |
मैंने उसकी हथेली पर मैंने औटोग्राफ दे दिया,उसने  
अपना दूसरा हाथ भी आगे किया |
मैंने दूसरे हाथ पर  "INDIA " लिखा |
उसका भाई उत्सुकता से अपना हाथ मेरी ओर किया और मैंने अपने हस्ताक्षर उसके  भी हथेली पर कर दिए |
दोनों भाई बहन अब अपनी माँ के पास  थे |
मुझे आगे जाना था , चल पड़ा 
दस्वेदानियां  ...|
 दस्वेदानियां ! नमस्ते ! नमस्ते ! का स्वर मैं सुन रहा था
मुख्तारम का निश्छल वात्सल्य प्रेम  बरबस याद आता है-
 नमस्ते ! यू इंडिया ? 

                                               - उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

मोदी जी बहुत खुश होंगे ।
हम तो हुऐ ही बहुत खुश ।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (27-07-2014) को "संघर्ष का कथानक:जीवन का उद्देश्य" (चर्चा मंच-1687) पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'