बुधवार, 14 सितंबर 2016

हिंदी , हृदय की भाषा है .....

*** नमन हिंदी को ,हिंदी वालों को ,हिंदी साधकों को
शून्य - काल का प्रश्न नहीं 
नहीं झील का यह प्रवाल
विस्तृत सागर का अंतस्थल
संस्कृतियों का उन्नत भाल-
हिंदी , हृदय की भाषा है
परिभाषा प्रखर अंतर्मन की
निखिल - विश्व का स्वर बने
ध्वजवाहक इसके दिगंत काल-
उदय वीर सिंह

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (16-09-2016) को "शब्द दिन और शब्द" (चर्चा अंक-2467) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'