शनिवार, 15 जुलाई 2017

यहाँ देशद्रोही भी जवान के समतुल्य होता है -

वहाँ सरहद पर वीर जवान शहीद होता है ,
यहाँ वलिदान का मान नहीं मूल्य लगता है -
प्रश्न करते हैं कि गोली सिने या पीठ पर लगी 
यहाँ देशद्रोही भी जवान के समतुल्य होता है -
संगठन रोते हैं बुहे फाड़ धर्म-जाति के नाम पर 
बताओ शहीद परिवारों के साथ खड़ा कौन होता है......  

 उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (16-07-2017) को "हिन्दुस्तानियत से जिन्दा है कश्मीरियत" (चर्चा अंक-2668) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Jyoti Dehliwal ने कहा…

सही कहा, यहां शहिद परिवार के साथ बहुत कम लोग खड़े होते हैं।