सोमवार, 3 जुलाई 2017

कुछ लोग चले जाते हैं तो अच्छा लगता है

कुछ लोग आते हैं तो अच्छा लगता है
कुछ लोग चले जाते हैं तो अच्छा लगता -
कुछ मौन रहते हैं अमन व खुशी के लिए
कुछ आवाज उठाते हैं तो अच्छा लगता है -
कुछ तोड़ लेते हैं रिश्ते झूठी शान में उदय 
कुछ लोग जोड़ लेते हैं नाते अच्छा लगता है -
कुछ लोग शमशान ले जाते हैं कुरीतियों को
कुछ संस्कारों का महल बनाते है अच्छा लगता है
कुछ लोग भूल जाते हैं किए अहसानों को
कुछ लोग ता-उम्र निभाते हैं अच्छा लगता है -
उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

vandana gupta ने कहा…

सही कहा

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (04-07-2017) को रविकर वो बरसात सी, लगी दिखाने दम्भ; चर्चामंच 2655 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'