रविवार, 24 सितंबर 2017

बेटी फरियादी नहीं हो सकती .....

वहसी लुटेरे जिस आँचल को फाड़ा
अपनी माँ से इजाजत अगर मांग लेते
कितने बे-खौफ हो कानून रब से
अपनी बहन बेटियों से ही डर मांग लेते -
नयन  हैं मुक़द्दस मगर नूर वाले नहीं 
नेत्रहीनों से ही नजर मांग लेते -
अंजान हो अपनी मंजिल से कितने
किसी हमसफर से डगर मांग लेते -
जलाने की पाए हो तालिम अपनी
आग सी धूप है एक शजर मांग लेते
लंका में सीता की आमद हुई है
राम भी आने वाले खबर जान लेते -
उदय वीर सिंह


3 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, सौ सुनार की एक लौहार की “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-09-2017) को रजाई ओढ़कर सोता, मगर ए सी चलाता है; चर्चामंच 2739 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

वाह ......