मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

लोग जलाते हैं दीपक बुझा लेते हैं आप

हवा में खड़े होकर जमीन उठा लेते हैं आप
बिना लाश जनाजा उठा लेते हैं
लोग जलाते हैं दीपक बुझा लेते हैं आप
खुदा ने बनाया है यही उसकी मर्जी है
गरीब का कितना तमाशा बना लेते हैं आप-
नदी सुख गई सदियाँ बीतीं कितनी
उसपर कितना मजबूत पूल बना लेते हैं आप -
जन्म मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों में नहीं
माँ को भी कितना यतीम बना लेते हैं आप -
उदय वीर सिंह

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (13-12-2017) को विदेशी आक्रमणकारी बड़े निष्ठुर बड़े बर्बर; चर्चामंच 2816 पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'