बुधवार, 6 जुलाई 2011

तमासबीन

सेंक     लेते     हैं   रोटियां ,  जली     आग    पर ,
जलाई    किसने , पता  कर  लेते  तो अच्छा था ..

हजारों      गम     जमानें    में      नजर     आए,
 गैर  का  है कौन , पता  कर  लेते  तो अच्छा था ...

सलीब  पर  टंगी बे- नकाब  जिंदगी , गा  रही  है ,
लिखे गीत  किसने , पता कर  लेते तो अच्छा था ...

नंगा      रहा      ताउम्र  ,   पैबंद     भी      रुसवा ,
जनाजा बाकफ़न  है ,पता कर लेते तो अच्छा था ...

नाकाबिल भी    काबिल   है ,  देने    को  रिश्वत ,
किसने  दिया नहीं , पता  कर लेते तो अच्छा था ...

आयेंगे     हरकारे     तब      जागेंगे     नींद     से,
सोया  नहीं  है कौन ,पता कर लेते तो  अच्छा  था ....

मंदिर   में   अकूत   दौलत  आई   कहाँ   से  कब ,
रिश्वत है ,या  प्यार ,पता  कर  लेते  तो अच्छा था ....

फ़कत  तदवीर  -ए -  रोटी   बीती   तमाम    उम्र ,
इंतजार  में  है  कौन , पता कर लेते तो अच्छा था ...

डूबता   है    देश ,  तमासबीन    बन   गए    उदय 
जिम्मेदार इसका कौन पता कर लेते तो अच्छा था ....
 
                                                       उदय वीर सिंह



14 टिप्‍पणियां:

Rakesh Kumar ने कहा…

डूबता है देश , तमासबीन बन गए उदय
जिम्मेदार इसका कौन पता कर लेते तो अच्छा था ....
उदय जी, पता बहुत किया तो पाया आप और हम ही जिम्मेवार हैं.

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

आयेंगे हरकारे तब जागेंगे नींद से,
सोया नहीं है कौन ,पता कर लेते तो अच्छा था ....
bahut hi badhiyaa

Arunesh c dave ने कहा…

आपका लेख आजके चर्चामंच की शोभा बढ़ा रहा है
धन्यवाद

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत शानदार ग़ज़ल लिखी है आपने!
याद मन्दिर की सताती पेट में जब रोटियाँ हो.
खूब मस्जिद याद आती पेट में जब रोटियाँ हो.

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सेंक लेते हैं रोटियां , जली आग पर ,
जलाई किसने , पता कर लेते तो अच्छा था ..

हजारों गम जमानें में नजर आए,गैर का है कौन , पता कर लेते तो अच्छा था ...


सच को प्रतिबिम्बित करती बेहतरीन रचना...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है!

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

मंदिर में अकूत दौलत आई कहाँ से कब ,
रिश्वत है ,या प्यार ,पता कर लेते तो अच्छा था ....
डूबता है देश , तमासबीन बन गए उदय
जिम्मेदार इसका कौन पता कर लेते तो अच्छा था ....


apko padh kar bahut acchha laga...sunder teekshan prahar karti sunder rachna.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

vaah,kya baat hai.

Kailash C Sharma ने कहा…

नंगा रहा ताउम्र , पैबंद भी रुसवा ,
जनाजा बाकफ़न है ,पता कर लेते तो अच्छा था ...

लाज़वाब प्रस्तुति..बहुत सटीक और सार्थक प्रस्तुति..

Amrita Tanmay ने कहा…

Yahi to samsya hai ki koi jaan kar bhi pata nahi karna chahta hai.sundar likha hai.

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

आयें हरकारे तब जागेंगे नींद से,
सोया नहीं है कौन ,पता कर लेते तो अच्छा था

डूबता है देश, तमासबीन बन गए उदय
जिम्मेदार इसका कौन पता कर लेते तो अच्छा था

भाव अत्यंत गंभीर लेकिन शैली ने दुरूह नहीं बनने दिया. स्पस्ट कथन लक्ष्य पर प्रहार. शिल्प आकर्षक और सुबोध.आभार.

सतीश सक्सेना ने कहा…

आयेंगे हरकारे तब जागेंगे नींद से,
सोया नहीं है कौन,पता कर लेते तो अच्छा था ....

बढ़िया शब्द चयन के साथ खूबसूरत रचना ...
शुभकामनायें आपको !

राकेश कौशिक ने कहा…

वाह उदय वीर जी - एक उम्दा ग़ज़ल जिसमें गहरा सन्देश मुखरित हो रहा है - हार्दिक बधाई

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत शानदार ग़ज़ल लिखी है ......सुन्दर प्रस्तुति