मंगलवार, 18 जुलाई 2017

मेरे वीर !

मेरे वीर !
आँसू देकर क्यों रोता है 
मैंने बोये शूल तेरे पथ 
प्रसून मुझे  तूँ क्यो बोता है 
हमने रोकी राह तुम्हारी 
हमने पुछे प्रश्न सतत 
पीर तुम्हारी  संग न था 
दर्द हमारे क्यों ढोता है 
निशा हमारी तमस हमारा 
झंझावात हमारे हैं 
पथ पथरीले नियति हमारी 
पथ दीपक क्यों सँजोता है -
उदय वीर सिंह 

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (19-07-2017) को "ब्लॉगरों की खबरें" (चर्चा अंक 2671) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'