रविवार, 10 फ़रवरी 2019

बोलो अपना देश बसंत


बसंत पंचमी की प्रीतमय बधाई मित्रों !
कहाँ तुम्हारा घर बसंत
बोलो अपना देश बसंत
होकर मौन जगा देते हो
जग जाता है जड़ चेतन
हम भूले तुम भूल पाते ,बसंत ह्रदय से अभिनन्दन -
बिना भेद के स्पर्श तुम्हारा
कंटक और अमराई को
प्राण प्रतिष्ठा कर देते हो
सोये सुर शहनाई को -
माटी मद-रस भींग रही ,भींग रहे कासा कंचन -
जीवन राग षट-राग अनेकों
एक राग चले मधु-राग सुघर
कोमल किसलय कचनार कली
सृष्टि पुलके पा धानी चुनर -
तन झंकृत मन हर्षित है ,गात यौवन मन संवेदन -
आँचल पीत पुष्प अलबेले
सब पथ सुगंध समीर बही
अनंग के संग सानंद रति
रस प्रीत सनेह के घोल रही -
रंगमहल छाजन में ,कथा बसंत की वन कानन -
उदय वीर सिंह






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