शुक्रवार, 9 मार्च 2012

अर्पिता

आँखों  में  
तिरते  सवाल ,
चाहते  हैं  जबाब  
देगा  कौन  ?
कसाब  [कसाई    ]
या  भीड़    
जिसने  बेच  दी अपनी   
भेड़ , 
खिला  कर  दाने  
निचोड़ा दूध  ,काटा  उन  
अब  कटने  के  लिए .....
मेमने  प्रतीक्षा  में   
न  लौट कर आएगी  मां  
जाना  होगा  कतार- वद्ध  
उसी  पथ ..... 
यही नियति  है  
या  रणनीति 
या छल  ?
अपराधी कौन ? 
अर्पिता  
या  
कसाब ? 
या  तमाशबीन  
भीड़  .........?


                                 उदय  वीर सिंह
                                 09 -03 -2012  .


     
     

7 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

बेबसी ।

सार्थक प्रयास ।

अच्छा सवाल ।

तमाशबीन बढे -

dheerendra ने कहा…

बहुत सुंदर रचना,बेहतरीन सार्थक प्रस्तुति,...
उदय जी,..इस पोस्ट पर जरूर पधारें....

MY RESENT POST ...काव्यान्जलि ...:बसंती रंग छा गया,...

RITU ने कहा…

अपराधी...अपराध करने वाला ही नहीं ..उसके सहभागी भी होते हैं

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मार्मिक प्रस्तुति ॥

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Rajput ने कहा…

बहुत मार्मिक मगर बेहतरीन प्रस्तुति.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

स्पष्ट है, अपराधी कौन है, न्याय आशान्वित..