बुधवार, 7 मई 2014

शराफत की पहचान होगी -



अगर  ले बुनोगे मोहब्बत के धागे
रेशम सी चादर मेहरबान होगी -

लिखे फलसफ़े हैं मोहब्बत के दामन
खुशियों की दुनियां परवान होगी -

गुलशन अगर गुल- गुलाबों का होगा
शराफत की दुनियां से पहचान होगी -

दुआ मांगते हो जब गैरों की रब से
तेरे दर दुआओं की बरसात होगी -

                                  -  उदय वीर सिंह

                                        




2 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…



वाह !
अच्छी कविता लिखी
आदरणीय उदय वीर सिंह जी

शुभकामनाओं सहित...