शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

बेबे ! .....सुहेले तेरे हथ !.


बेबे ! छुटगे सुहेले तेरे हथ !...
अस्सी याद तैनुं बहुत आवांगे-
कोसां दूध दी कटोरी गयी डुल
फेर अस्सी किथे पावांगे-
कोण पुंजेगा हंजू तेरे अंख दा,
कोल आके फेर नस जावांगे-
आ दसुंगे गल सुपने विच पीड़ दा,
बेबे ! दासता मैं मौत दी सुना जावांगे-
उदय वीर सिंह
[ हिन्दी भावार्थ ]
अम्मा तेरे सुभागे हाथ छुट गए
हम भी आप को बहुत याद आएंगे
गुंगुने दूध की गिलास हाथ से छूट गयी
फिर मुझे अब कहाँ मिलेगी -
अब तेरे आँखों के आँसू कौन पोंछेगा
हम पास का अहसास हो फिर चले जाएंगे
फिर सपने में आकर अपनी पीड़ा सुनाएँगे
अम्मा अपनी मौत की पूरी दासता सुनाएँगे-
उदय वीर सिंह
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3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (20-12-2014) को "नये साल में मौसम सूफ़ी गाएगा" (चर्चा-1833)) पर भी होगी।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (20-12-2014) को "नये साल में मौसम सूफ़ी गाएगा" (चर्चा-1833)) पर भी होगी।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (20-12-2014) को "नये साल में मौसम सूफ़ी गाएगा" (चर्चा-1833)) पर भी होगी।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'