रविवार, 8 मार्च 2015

तुम श्रद्धा हो .....

'पूजा हो 
प्रतिफल हो 
विस्वास अटल ..
श्रद्धा हो 
निष्ठा हो अविचल 
शक्ति 
वत्सला स्नेह 
निर्मल मन 
अभिव्यक्ति 
सृजन की सृष्टि की ....
प्रतिमूर्ति 
दया की करुणा की ....
संभावना 
असीम 
कल्याण की कृपा की... 
नारी !
तुम भी कुछ कह  दो 
क्या हो ...
क्यों हो अबूझ 
खोल रहस्य 
मत हो मौन ...
नारी !
तुम श्रद्धा हो ..... । 

उदय वीर सिंह'पूजा हो
प्रतिफल हो
विस्वास अटल ..
श्रद्धा हो
निष्ठा हो अविचल 
शक्ति
वत्सला स्नेह
निर्मल मन
अभिव्यक्ति
सृजन की सृष्टि की ....
प्रतिमूर्ति
दया की करुणा की ....
संभावना
असीम
कल्याण की कृपा की...
नारी !
तुम भी कुछ कह दो
क्या हो ...
क्यों हो अबूझ
खोल रहस्य
मत हो मौन ...
नारी !
तुम श्रद्धा हो ..... ।

उदय वीर सिंह

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (10-03-2015) को "सपना अधूरा ही रह जायेगा ?" {चर्चा अंक-1913} पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'