मंगलवार, 17 मार्च 2015

संवाद होना चाहिए....

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रश्मिरोधी द्वार पर ,आघात होना चाहिए
मौन हुए अधरों से अब संवाद होना चाहिए
समुन्नति में बाधक पीर वर्जनाएं क्यों जीएं
आयुहीन हो निहारिका संघात होना चाहिए -

कभी संहिता की कोख संशय आकार ले
हर हृदय में प्रेम और विस्वास होना चाहिए
क्षितिज पर हों पाँव के पुष्ट आधार निर्मित
उड़ान के लिए  मुक्त आकाश होना चाहिए -



उदय वीर सिंह

3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (18-03-2015) को "मायूसियाँ इन्सान को रहने नहीं देती" (चर्चा अंक - 1921) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (18-03-2015) को "मायूसियाँ इन्सान को रहने नहीं देती" (चर्चा अंक - 1921) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Smart Indian ने कहा…

प्रेरक शब्द।