गुरुवार, 26 मई 2016

बनाई राह चलने की

बनाई राह  चलने की 
वो भी कुछ लोग थे 
मिटाई राह चलने की 
वो भी कुछ लोग थे -
जलाए दीप जलकर भी  
वो भी कुछ लोग थे 
खाई घास की रोटी 
वो भी कुछ लोग थे -
गाए गीत फंदों पर 
वो भी कुछ लोग थे 
जाए जींद जिये वतन 
वो  भी कुछ लोग थे -

उदय वीर सिंह 

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (28-05-2016) को "आस्था को किसी प्रमाण की जरुरत नहीं होती" (चर्चा अंक-2356) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'