शनिवार, 1 मार्च 2014

कर्जे उतार लो

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वक्त गुजरा वो आईना है
जुल्फें संवार लो - 

जो लगे हैं दाग चेहरे 
उनको उतार लो -

भर न पायी आँख जिनको
दिल में उसार लो - 

हक़ था जिनका दे न पाये
वो कर्जे उतार लो -

- उदय वीर सिंह

4 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच कही, गहरी बात।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (02-03-2014) को "पौधे से सीखो" (चर्चा मंच-1539) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar ने कहा…

बहुत खूब