मंगलवार, 25 नवंबर 2014

गुरु तेगबहादुर सिंह [नवें पातशाह] हिन्द दी चादर


धन्य है सतगुरु ! तेरी मीरी और पीरी !
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खून था किनकी रगो में
नीर  था किनकी नजर -
प्यास किसकी खून की थी 
कौन रोया दर - बदर -
किसकी दर ने लाज राखी
कौन थे कौमे- जिगर
आह थी और जुल्म था
यौमे जालिम ओ सितमगर -
इंसाफ की शमशीर किसकी
कौन थे कौमे मुकद्दर -
इंसानियत के कौन दुश्मन
कौन प्यारे हमसफर -
जीया जिन्होने हिन्द खातिर
गुरु सिक्ख थे नुरे नजर-
धरती गगन दोनों ही रोये
जब चले अंतिम सफर -
उदय वीर सिंह

1 टिप्पणी:

Madan Saxena ने कहा…


बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
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