रविवार, 9 नवंबर 2014

रहना तो पिया बनकर


रहना तो पिया बनकर 

यूं मुनासिब नहीं बहना
आग का दरिया बनकर -

जिंदगी अच्छी है जीना 
प्यार का जरिया बनकर-

जाना दिल में उतर जाना ,
गजल का काफिया बनकर- 

कुछ तो रौशनी होगी
जलें बाती हम दीया बनकर -

उदय वीर सिंह 




2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (10-11-2014) को "नौ नवंबर और वर्षगाँठ" (चर्चा मंच-1793) पर भी होगी।
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चर्चा मंच के सभी पाठकों को
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत बढ़िया