सोमवार, 24 अप्रैल 2017

क्यों रोये माटी का पूत -

आँख भरी आंचल खाली है
भरे गोदाम खाली थाली है
अन्न दाता याचक बन रोये
स्वप्न भरे हैं घर खाली है -
कर्जों से उनकी भरी किताबें
बटुआ मुद्रा से खाली है -
अंग -प्रत्यंग है कर्ज भरा .
खुशहाली से जीवन खाली है -
सजे मंदिर मसीत गिरजा गुरुद्वारे
बे-पर्दा किसान आँगन .खाली है -
शिगाफों ,से तन ,दिखता है ..
चिथड़े वसन हैं माँ बेटी के
आनंद मनाता साहूकार
देख लहलहाती अपनी खेती के -
जर जोरू जमीन का सौदा
वो करते हुए सवाली है
क्यों आत्महत्या का पथ चुनता
स्वर राजपथों से खाली है
उदय वीर सिंह

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