रविवार, 28 अक्तूबर 2012

कानून.. जो गिर पड़ी है....



माननीय !
आपके निष्ठावान,
कड़क बचन ,
कानून, अपने हाथ में
न लें...!
कानून महफूज हाथों में है  l
निर्दोष ,मजलूम ,लाचार
भूखे, नंगे ,अधनंगे,आप की जद में हैं
अपराधी ,षड्यन्त्रकारी ,बलात्कारी ,
फरेबी, लुटेरे  देश, समाज- द्रोही ,
आपकी पकड़ से बाहर....
शामे महफ़िल के हमसफ़र हैं  l
लिख रहे हैं, आपकी  करेक्टर रिपोर्ट
जो ढीली है ....
नशे में या दहशत में आप इतने कि ,
पतलून गीली है l
कांपते हाथों से कानून,
गिर पड़ी  है......l
अजीब पसोपेश में हैं
आप उठाएंगे नहीं ,
हमें उठाने नहीं देंगे ......

             -  उदय वीर सिंह .








7 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

कटु सत्य...बहुत सटीक अभिव्यक्ति..

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह!
आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को कल दिनांक 29-10-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1047 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

स्थितियाँ अवश्य सुधरेंगी..

रविकर ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति |
आभार आदरणीय ||

lokendra singh ने कहा…

बहुत खूब

dheerendra bhadauriya ने कहा…

भाई,,,बहुत सार्थक सटीक कथ्य,,,,,

RECENT POST LINK...: खता,,,

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सटीक ..