बुधवार, 24 अक्तूबर 2012

राम -रावन विथियाँ हैं


मित्रों ! विजयादशमी  की अनंत मंगल कामनाएं l  पवित्र -ग्रन्थ  सद्दभाषित करते हैं" सत्यमेव जयते " जिसकी पुष्टि भी होती आई है l  जो कायम  रहे - 




राम ,  रावन ,  विथियाँ  हैं  
राम,      रावन       संहिता  
एक   सृजन   की   मीत है,
पाप   की    एक,   वाहिका-
***
एक  नदी है  पावनी , प्राण
-जल ,    झर  -   झर     बहे ,
मदिरा  भरी, एक  झील है,
हम ही हम ,निशिदिन कहे -

एक   मधुर -  रस , मंजरी 
एक   रुदन  की  मल्लिका-
****
एक सुनामी अंक ले अतृप्त
मानस     बिन   ठाँव    की,
एक    कलश   अमृत   भरे,
प्रतिदान   देती   नाम   की- 

एक   के  वन  पुष्प- पीयूष
एक    के     हिय    कंटिका-
****
न्याय  की  एक  पाठशाला ,
अन्याय  की   एक   मूल है,
एक जीवन  की,प्राण- वायु 
एक       वेदना     स्थूल   है-

एक    प्रज्ञा    का,  तख़्त है, 
एक    दुखों   की ,  शायिका-
****  
एक  है  पथ ,खून - लतफत  
एक   डगर   है,    प्रेम    की,
मानस एक अभिशप्त,वंचित 
गेह     है   एक,    नेह     की -

एक  अधर्म   की  पोषिका है 
धर्म     की   एक      रक्षिका- 

                       -  उदय वीर सिंह 

     
   

    

   
   

    

3 टिप्‍पणियां:

Manu Tyagi ने कहा…

विजयदशमी की शुभकामनाऐं

Dheerendra singh Bhadauriya ने कहा…

बहुत उम्दा सृजन,,,,
विजयादशमी की हादिक शुभकामनाये,,,
RECENT POST...: विजयादशमी,,,

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दो पथ हैं ये दो,
और कभी जब टकराते ये,
हमें ज्ञात निष्कर्ष सभी।