शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

आवेदन भी है


गीतों के श्री आँगन में प्रेम भी है
श्रिंगार भी है, वेदन भी है -
स्मृतियों के सुंदरवन स्नेह भी है
आभार भी है,संवेदन भी है -
स्नेह के कुंज में शांति शुलभ
विनय भी है, आवेदन भी है -
हो सहयोग क्षितिज का आलंबन
विश्वास भी है प्रतिवेदन भी है -
संकल्प हृदय का आभूषण है
वर प्रज्ञा का निकेतन भी है -
पीर के मर्म में वत्सलता धीर भी है
नीर भी है अतिरंजन भी है -

उदय वीर सिंह 




      
        

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (24-01-2015) को "लगता है बसन्त आया है" (चर्चा-1868) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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बसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'