रविवार, 13 मार्च 2016

अंगारों से हाथ जले कम



अंगारों से हाथ जले कम
अधिक जले जलधारों से -
तलवारों से शीश कटे कम
अधिक कटे कुविचारों से -
शत्रु से नुकसान हुए कम
अधिक हुए गद्दारों से
सृष्टि सृजन औजारों से है
विनष्ट हुए हथियारों से -
शंसय विपदा ने कम लूटा
अधिक लूटे हम यारों से -
उदय वीर सिंह 

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (14-03-2016) को "एक और ईनाम की बलि" (चर्चा अंक-2281) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

GathaEditor Onlinegatha ने कहा…

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