बुधवार, 21 नवंबर 2012

कर्मवीर की भाषा है-


जो   मिला   स्वीकार्य  सौम्य
जीने       की      प्रत्यासा    है  -
रीत   सृजन     ही   जीवन  है
एक   कर्मवीर   की   भाषा  है-

रो - रो   जीया  क्या   जिया,
हंस  कर  जीया  जिन्दादिल
देना    खुशियाँ   खुले    हाथ
एक  दानवीर   को  आता  है-

न  छीन हंसी मम अधरों की
हंसने     दो     मुस्काने    दो ,
अन्तरिक्ष  के  नील वलय में
यत्र   -  तत्र     विखराने    दो-

धरा   ही   क्यों ,ब्रहमांड हँसे ,
गृह -  नक्षत्र    में   मोद  भरे,
शांति - भाव    की  शर्तों  पर  
अस्थि    साज   बन  जाताहै -

जब पवन चली नैराश्य लिए ,
दैन्य    भाव    का    संपेषण
स्थापित साम्राज्य ख़ुशी का
बहु  लोक संभव है अन्वेषण -

शंशय  की  सीमा मिट  जाये
मंगल  प्रभात   जब आता है,
मंगल ध्वनि उचरित होती है
स्नेहिल    उर  जब  गाता  है-

सागर  के  आँगन  कोलाहल
वैधव्य  सृष्टि   का    संभव है
सम्भव नहीं सपथ से मुकना
जो  भरत   वंश  दे  जाता  है-


न्योछावर अभिलाषाएं समस्त ,
जीवन   कब  मिलता बार बार ।
संवत्सर   बदले   युग    बदला 
सौगंध   न   बदली   एक  बार  -

पायल की मोहक राग- माधुरी ,
अनंग  त्याज्य  हो   जाता  है,
खडकी शमशीर तो क्या खडकी,
कंगन     कटार   बन  जाता है ।

सतत      सपथ   अक्षुण     रहे ,
जो ली शरणागत  की रक्षा में ,
किश्तों   में  जीना  क्या जीना 
एक  बार   ही  मरना  आता है ,

है   भारत    तो     हम   भारत,
ग्लानी    नहीं   हम  गर्व   करें,
हम   बलिदानी   जत्थों   से  हैं,
परहित       मिटना     आता है -

                              -उदय वीर सिंह 


 


 
 

13 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर ॥कर्मवीर की सटीक परिभाषा

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति वाह!

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भाई उदयवीर जी सत श्री अकाल |बहुत सुन्दर कविता |

रविकर ने कहा…

शुभकामनायें भाई जी ।।
सटीक प्रस्तुति ।।

न छीन हंसी मम अधरों की
हंसने दो मुस्काने दो-

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

भावपूर्ण अभिव्यक्ति .....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कर्मशीलता की अलख जगाने के लिये शत शत आभार..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

Asha Saxena ने कहा…

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना है |
आशा

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

स्वागत योग्य है यह प्रेरणा देती ओजस्वी रचना!

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

स्वागत योग्य है यह प्रेरणा देती ओजस्वी रचना!

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

बहुत प्रेरक एवं ओजमयी कविता है -साधुवाद !

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना |

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

बेहतरीन ....