बुधवार, 30 अक्तूबर 2013

नैन उनके भी नम थे ......

नैन उनके भी नम थे ......

कभी  कह  सकेंगे  ज़माने को जाना 
उल्फत  भी  जिन्दा, थी  तेरे दम से -

निजामत  तेरी  थी, गुलशन भरा था 
खुशियां ज्यादा ,गम कितने  कम थे -

कोई जल गया कोई रुसवा हुआ भी
जब  तुम चले नैन,उनके भी नम थे -

किसकी ख़ुशी थी, किसके सितम थे 
सरमाया   दिल  के , बहारे  चमन थे- 

                                          - उदय वीर सिंह . 

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (30-10-2013) त्योहारों का मौसम ( चर्चा - 1401 ) में "मयंक का कोना" पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मन छूती पंक्तियाँ