शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

सुखद क्षण [लोकार्पण ]



महामहिम डॉ हामीद अंसारी जी उप राष्ट्रपति भारतीय गणतन्त्र के अनमोल शब्द जो उनके बे-मिशाल व्यक्तित्व, विशाल हृदय व विषय मर्मज्ञता की अमिट छाप छोड़ गए । मेरे लिए सौगात व निधि बन कर हृदय में संचित हो गए ।
- उदय वीर सिंह जी आप बहुत अच्छा लिखते हैं ।
- कलम रुकने न पाये लिखते रहिए ।
- कलमकार किताब देता नहीं, उससे किताब मांगी जाती है ।
[और महामहिम ने अद्वितीय विनम्रता से अपने दोनों हाथ फैला कर किताब ली जो मैंने अपने जीवन में सुना तो था आज प्रत्यक्ष पाया । जीवन अविभूत हुआ ]
- उदय वीर सिंह जी मैं इन पुस्तकों को लेखक व पाठक दोनों की नजरों से पढ़ूँगा ।
- एक इंसान व साहित्यकार दोनों रूपों में आप एक से दिखते हैं ।
- आप से समाज व देश को बहुत आशाए हैं ।
-आप को बहुत बहुत मेरी शुभकामनाएं व बधाइयाँ ।
इस थोड़ी सी मुलाक़ात में विषद अर्थ लिए महामहिम की आशीष के सद्द्वचन मेरे लिए धरोहर ही तो है ।
आप से अपनी खुशी व हृदय के उदद्गारों को साझा कर अभिभूत हूँ मित्रों ।
उदय वीर सिंह

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (30-04-2016) को "मौसम की बात" (चर्चा अंक-2328) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'