गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

कायम रवे मादरे वतन .....

सानू  यकीन हैगा  मसिया दी रात दी सवेर होवेगी
मसले किन्ने हो जाण बड्डे  ओसदे निबेड़ होवेगी
हर अमीरों गरीब दा जज़्बात वतन दी हिफाजत होवे
वीर कायम रवे मादरे वतन, ताहीं  तेरी खैर होवेगी -
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ਸਾਨੂ ਯਕੀਨ ਹੈਗਾ ਮਸਿਆ ਦੀ ਰਾਤ  ਦੀ ਸਵੇਰ ਹੋਵੇਗੀ
ਮਸਲੇ ਕਿੰਨੇ ਬਡੇ ਹੋ ਜਾਣ ਓਸਦੇ ਨਿਬੇੜ ਹੋਵੇਗੀ -
ਹਰ ਅਮੀਰੋ ਗਰੀਬ ਦਾ ਜਜਬਾਤ ਵਤਨ ਦੀ ਹਿਫਾਜਤ ਹੋਵੇ
ਵੀਰ ਕਾਯਮ ਰਵੇ ਮਾਦਰੇ ਵਤਨ ਤਾਹੀਂ ਤੇਰੀ ਖੈਰ ਹੋਵੇਗੀ -

उदय वीर सिंह

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (22 -04-2016) को "आओ बचाएं अपनी वसुन्धरा" (चर्चा अंक-2320) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'