शनिवार, 15 जनवरी 2011

कहा उनको -सूना उनको

हमने कहा  उनको
हमने लिखा उनको 
हमने सूना उनको ,
कितना अंतर है ,
कितना भ्रम है  /
आरत मन में 
विक्षोभ उत्पन्न ,
यूँ ही नहीं होता ,
सड़ांध आती है हमारी सहन शीलता ,
जब लाँघ जाती है
सीमाएं /
कायरता बनती है ,हमारी सहृदयता
सहजता ,
       जब सुनने का बनते है यन्त्र ,
       बजने का यन्त्र ,बनते ही  ,
उठता है शोर ,गतिरोध  /
विक्षोभ को शांत ,समाप्त करने का विकृत प्रयास
आकार लेता है /
मिटाने का प्रयत्न ,--रोगी को ,
रोग नहीं /
 कहे जाते अनकहे कथ्य
आखिर तूं ,
पैदा ही क्यों हुआ  ?
प्रोब्लम कहीं का    /

                       उदय वीर सिंह 
                       १४/०१/२०११

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. हरदीप संधु ने कहा…

बहुत अच्छे व गहरे भाव लिए हुए आपकी यह रचना !

Kailash C Sharma ने कहा…

कायरता बनती है ,हमारी सहृदयता
सहजता ,
जब सुनने का बनते है यन्त्र ,
बजने का यन्त्र ,बनते ही ,
उठता है शोर ,गतिरोध /

जीवन के कटु सत्य का बहुत सटीक चित्रण..