गुरुवार, 24 जनवरी 2013

भारत हमारा



शीर्ष  संवेदनाओं   का   भारत   हमारा 
फूलों   का    आंचल ,  अंगारे    न   देंगें-
वीथियों   में   बसंती  बहारों  का  मेला
पतझड़   को  उपवन  में  आने   न  देंगें -

यश- प्रभा मंजरी शांति सुख का सवेरा 
प्रीत  की  रीति का ही सृजन मांगता है 
वेदना  के   प्रवाहों  में बहता है फिर भी
मानस    में    प्रज्ञा    प्रखर   बांटता   है-

शांति - एका  का संदेश - वाहक रहा  है 
शांति  का  पुंज धरती से मिटने  न देंगें-
   
शौर्य  का ,धैर्य  का , सौम्य  का  रूप  है 
इसकी धरती  पर ईश्वर के पग आते हैं
सभ्यताओं का घर प्रेम  की  पाठशाला
दिया   जो   वचन   वो   अमर   होते  हैं-  
     
आग  विद्वेष   की  जो  जलाई  किसी ने 
हृदय   में   है   सागर   दहकने   न   देंगे-

                                 -उदय वीर सिंह  

6 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

आग विद्वेष की जो जलाई किसी ने
हृदय में है सागर दहकने न देंगे- उम्दा प्रस्तुति,

गणतंत्र दिबस की हार्दिक शुभकामनाए,,,

recent post: गुलामी का असर,,,

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

संस्कृति के उन्नत शिखर पर पुनः स्थापित होगा भारत..

रविकर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति |

vandana gupta ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (26-1-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

रचना दीक्षित ने कहा…

अब भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता.

आपको गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनायें.

Sadhana Vaid ने कहा…

ओज और जोश से भरी भावपूर्ण रचना ! बहुत सुन्दर ! गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !