बुधवार, 17 अगस्त 2016

झोली निर्धन के आँसू हैं -

आजादी के राजमहल
विपदा क्रंदन आँसू हैं -
आँखों में अंजन आँसू हैं 
थाली में व्यंजन आँसू हैं -
आजादी के सावन में
सहमें सहमें घन आँसू हैं -
आजादी के राजपथों पर
आँचल में मिलते आँसू हैं -
कितनी बेटी आजाद हुई
बेटी का जीवन आँसू हैं -
आजाद हुआ पैसे वाला
झोली निर्धन के आँसू हैं -
थैली शाहों की सत्ता सजती
अंख लोकतन्त्र के आँसू हैं -
कल यतीम था आज भी है
घर किसान के आँसू हैं -
बेबस नीलाम बाज़ारों में
चूड़ी कंगन के आँसू हैं -
फुला फलता अफीम चरस
रोली चन्दन के आँसू है -
कर्जों में डूबे मात पिता
अंख काका काकी आँसू हैं
उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 18-8-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2438 में दिया जाएगा
धन्यवाद

रश्मि शर्मा ने कहा…

बहुत उम्‍दा